एक्स चेसर

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time:2021-10-22 05:41:13 वित्तीय लक्ष्‍यों तक जल्दी पहुंचने के लिए इक्विटी या डेट फंड में से किसमें निवेश करें? Views:4591

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आप जो एसेट क्‍लास चुनते हैं, वह उस लक्ष्‍य पर निर्भर करता है जिसके लिए आप निवेश कर रहे हैं.
वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अपनी बचत को सही एसेट क्लास में निवेश करना जरूरी है. इन लक्ष्‍यों में बच्‍चों की शिक्षा, घर खरीदना, रिटायरमेंट इत्‍यादि शामिल हैं. लंबी अवधि में एसेट बनाने में दो एसेट क्‍लास - इक्विटी और डेट अहम भूमिका निभाते हैं. हालांकि, आप पूछें कि अपने लक्ष्‍यों को जल्‍दी से पाने के लिए इक्विटी और डेट फंड में से बेहतर कौन है तो जवाब शायद आसान नहीं होगा. सच तो यह है कि इन दोनों का कॉम्बिनेशन और सही इस्तेमाल लक्ष्‍यों को पाने में मदद करेगा.

आप जो एसेट क्‍लास चुनते हैं, वह उस लक्ष्‍य पर निर्भर करता है जिसके लिए आप निवेश कर रहे हैं. यह फैसला आपकी उम्र, जोखिम लेने की क्षमता और बाजार की स्थितियों से भी तय होता है.

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अगर आप युवा (20 के पड़ाव में) हैं और रिटायरमेंट के लिए बचत शुरू करना चाहते हैं तो आपका निवेश इक्विटी म्‍यूचुअल फंड में ज्‍यादा होना चाहिए. इक्विटी म्‍यूचुअल फंड अपने एसेट का 65 फीसदी इक्विटी या अन्‍य संबंधित प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं. लंबी अवधि में इक्विटी में अन्‍य एसेट क्‍लास के मुकाबले बेहतर रिटर्न पैदा करने की क्षमता होती है. साथ ही जब आप लंबी अवधि जैसे 10 साल या इससे ज्‍यादा के लिए इक्विटी में निवेश करते हैं तो अस्थिरता को जोखिम भी घटता है. ऐसे में 20 के पड़ाव में जो लोग हैं, उन्‍हें अपनी बचत का 80 फीसदी इक्विटी फंड में सिप के जरिये निवेश करना चाहिए अगर वे अपने रिटायरमेंट के लिए बचत कर रहे हैं.

लेकिन, आप 50 के पड़ाव में हैं और रिटायरमेंट के लिए बचत कर रहे हैं तो आप इक्विटी में इतना भारी-भरकम निवेश नहीं कर सकते हैं. उस स्थिति में कोई अपनी बचत का 25 फीसदी से 40 फीसदी इक्विटी में निवेश कर सकता है. यह उनकी जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करता है.

रिटायरमेंट के बाद भी इक्विटी म्‍यूचुअल फंडों में कुछ पैसा लगाए रहना चाहिए. यह महंगाई के असर को कम करता है. चूंकि एफडी और डेट प्रोडक्‍टों पर मौजूदा कम ब्‍याज दर के माहौल में रिटर्न घटा है. ऐसे में इक्विटी का कुछ निवेश इसकी भरपाई कर सकता है.

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अगर आइडिया पूंजी की सुरक्षा है न कि ज्‍यादा रिटर्न तो डेट फंड सही विकल्‍प हैं. डेट फंडों में अस्थिरता कम होती है. हालांकि, रिटर्न कम होता है. डेट फंड कैटेगरी के भीतर भी अलग-अलग अस्थिरता और रिस्‍क प्रोफाइल वाले फंड होते हैं. लॉन्‍ग टर्म डेट फंड मुख्‍य रूप से लंबी अवधि के सरकारी बॉन्‍डों में निवेश करते हैं. कॉरपोरेट बॉन्ड फंड अर्थव्यवस्था में ब्‍याज दर के फ्लक्‍चुएशन को लेकर बहुत संवेदनशील होते हैं.

हालांकि, शॉर्ट-टर्म डेट फंड ब्‍याज दर के फ्लक्चुएशन को लेकर कम संवेदनशील होते हैं. कारण है कि ये छोटी अवधि के डेट इंस्‍ट्रूमेंट जैसे ट्रेजरी बिल, कमर्शियल पेपर इत्यादि में निवेश करते हैं. इस तरह के फंड उन लक्ष्‍यों के लिए मुफीद होते हैं जो एक से तीन साल दूर हैं. वहीं, इमर्जेंसी फंड बनाने जैसे बहुत छोटी अवधि के लक्ष्‍यों के लिए लिक्विड फंड या ओवरनाइट फंड उपयुक्‍त विकल्‍प हैं.

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सामान्‍य सिप के मामले में निवेशक सिप की अवधि में अपना कॉन्ट्रिब्‍यूशन नहीं बढ़ा सकते हैं. अगर वे इसे बढ़ाना चाहते हैं तो उन्‍हें नए सिरे से सिप शुरू करना होगा या एकमुश्त निवेश करने की जरूरत होगी.बुधवार को देश की सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने भी अपनी कारों के दाम बढ़ाने का एलान किया था. कीमतों में यह बढ़ोतरी जनवरी से लागू होगी.व्हॉट्सएप ने अपने एप पर 'शॉपिंग बटन' जोड़ा, जानिए क्‍या होगा फायदा

वित्त वर्ष 2020-21 में घरेलू म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 41 फीसदी बढ़कर 31.43 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचई गई.भारतीय नियामकों का ऐसी करेंसी को लेकर रुख स्पष्ट नहीं है. उन्‍होंने साफ-साफ कुछ भी नहीं कहा है कि भारतीय इनमें ट्रेड करें या नहीं.ये कंपनियां भी बढ़ा रही हैं अपने वाहनों के दाम, जनवरी से हो जाएंगे महंगे

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सक्रिय रूप से मैनेज किए जाने वाले लार्ज कैप म्‍यूचुअल फंड के तौर-तरीकों का पिछले कुछ सालों में सभी को पता लग गया है. कुछ को छोड़ ज्यादातर स्कीमों ने प्रमुख सूचकांकों से कमतर प्रदर्शन किया है.

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